यह पावन धार्मिक ग्रंथ हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला 'श्रीलिंगमहापुराण' है, जो मुख्य रूप से देवाधिदेव भगवान शिव की महिमा और उनके निराकार व साकार स्वरूप को समर्पित है. अग्रणी धार्मिक प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस प्रामाणिक संस्करण में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ अत्यंत सरल, शुद्ध और प्रवाहमयी हिन्दी व्याख्या (अनुवाद) दी गई है ताकि आम पाठक भी इसके गूढ़ अर्थ को आसानी से समझ सकें. इस महापुराण में शिव-तत्त्व के रहस्य, ब्रह्मांड की उत्पत्ति, शिवलिंग की स्थापना व पूजन की शास्त्रीय विधियाँ, अघोर मंत्रों का महत्व और भगवान शिव के विभिन्न दिव्य अवतारों की कथाओं का विस्तृत संकलन है. पुस्तक के मुख्य पृष्ठ पर प्रभु श्री राम द्वारा रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना और पूजन करने का अत्यंत दिव्य पौराणिक चित्र अंकित है, तथा इसके भीतर समाहित सुंदर रंगीन चित्र (सचित्र) शिवभक्ति के प्रसंगों को जीवंत बनाते हैं. यह पवित्र ग्रंथ दैनिक स्वाध्याय, शिव साधना की पूर्णता, मानसिक शांति और घर में आध्यात्मिक सकारात्मकता की वृद्धि के लिए एक सर्वोत्तम व अनिवार्य संग्रह है.
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