यह पावन गुटका गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज विरचित श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान 'सुन्दरकाण्ड' है। इस विशेष संस्करण की मुख्य विशेषता इसका "बृहदाकार टाइप" (अत्यंत बड़े अक्षर) होना है, जो वरिष्ठ नागरिकों और प्रतिदिन पाठ करने वाले भक्तों के लिए बिना किसी नेत्र-तनाव के पढ़ने को बेहद सुगम और स्पष्ट बनाता है। इस पुस्तक में केवल मूल चौपाइयाँ, दोहे और छंद दिए गए हैं (बिना हिंदी अनुवाद के), जिससे पाठ की लय और शुद्धता बनी रहती है। इसके साथ ही, भक्तों की दैनिक साधना को पूर्ण करने के लिए इसमें श्रीहनुमानचालीसा को भी शामिल किया गया है। अशोक वाटिका में माता सीता और हनुमान जी के मिलन के सुंदर आवरण चित्र से सुसज्जित यह पुस्तक हनुमान जी की आराधना, संकटमुक्ति और मानसिक शांति के लिए नित्य पाठ करने हेतु एक आदर्श धार्मिक निधि है।
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