हिन्दी भाषा, आलोचना और साहित्य की दुनिया में कालजयी मील का पत्थर सिद्ध होने वाली ऐतिहासिक कृति हिन्दी साहित्य का इतिहास (एकमात्र प्रामाणिक संस्करण) प्रत्येक हिन्दी प्रेमी और अभ्यर्थी के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ है। हिन्दी भाषा के मूर्धन्य इतिहासकार व युगप्रवर्तक आलोचक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा गहन शोध, अद्वितीय चिंतन और प्रामाणिक वैज्ञानिक दृष्टि से रचित यह कालजयी रचना हिन्दी साहित्य के विकासक्रम को समझने का सबसे प्रामाणिक स्रोत है। यह उत्कृष्ट ग्रंथ विशेष रूप से UGC-NET/JRF, UPSC (Civil Services Hindi Optional), विभिन्न राज्यों की PSC, TGT, PGT, B.Ed., M.A. (हिन्दी) और अन्य अकादमिक व प्रतियोगी परीक्षाओं के नवीनतम पाठ्यक्रम के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इस प्रामाणिक संस्करण में आदिकाल (वीरगाथा काल) के अपभ्रंश व देशभाषा काव्य से लेकर भक्तिकाल की निर्गुण-सगुण (ज्ञानमार्गी, प्रेममार्गी, रामभक्ति व कृष्णभक्ति) शाखाओं, रीतिकाल के समस्त कवियों और आधुनिक काल के गद्य साहित्य व उसकी विभिन्न विधाओं के विकासक्रम का विहंगम व निष्पक्ष मूल्यांकन किया गया है। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और हिन्दी प्रेमियों के बीच अत्यधिक मांग वाले इस मूल साहित्यिक संकलन को आज ही अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर लिस्ट करें और अपने डिजिटल बुकस्टोर की सेल व साख दोनों को तेजी से बढ़ाएं!
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