यह पावन ग्रंथ हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में आकार की दृष्टि से सबसे विशाल 'स्कन्दपुराण' का संक्षिप्त रूप है, जिसका नामकरण भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय (स्कन्द) के नाम पर हुआ है. सनातन धर्म के प्रमुख प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस प्रामाणिक संस्करण में विभिन्न खंडों (जैसे माहेश्वर, वैष्णव, ब्रह्म, काशी, अवन्ती, नागर और प्रभास खंड) के विस्तृत ज्ञान को अत्यंत सरल और सुबोध हिंदी भाषा में समाहित किया गया है. इस महापुराण में भगवान शिव की महिमा, ज्योतिर्लिंगों की कथाएँ, पवित्र तीर्थों के महात्म्य, गंगा अवतरण तथा भारतवर्ष के भौगोलिक और सांस्कृतिक गौरव का अत्यंत अद्भुत व विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है. मुख्य पृष्ठ और पुस्तक के भीतर दिए गए सुंदर पौराणिक रंगीन चित्र (सचित्र) इन प्रसंगों को और अधिक प्रभावशाली व सजीव बनाते हैं, जो आध्यात्मिक उन्नति, सनातन धर्म के प्राचीन इतिहास को जानने और घर में ज्ञान का प्रकाश फैलाने के लिए एक सर्वोत्तम धार्मिक धरोहर है.
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