यह परम पावन ग्रंथ सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक और दार्शनिक ग्रंथों में से एक 'योगवासिष्ठ' का संक्षिप्त रूप है, जो अद्वैत वेदांत दर्शन का एक अद्भुत स्तंभ है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस प्रामाणिक संस्करण में महर्षि वसिष्ठ द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को दिए गए परम ज्ञान के उपदेशों को अत्यंत सरल और सुबोध हिंदी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। जब युवावस्था में श्री राम के मन में संसार के प्रति वैराग्य उत्पन्न हुआ था, तब गुरु वसिष्ठ ने उन्हें मन की स्थिति, संसार की असत्यता, आत्मज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के रहस्यों को कहानियों और दृष्टांतों के माध्यम से समझाया था। पुस्तक के मुख्य पृष्ठ पर सिंहासन पर विराजमान ब्रह्मर्षि वसिष्ठ और उनके समक्ष हाथ जोड़कर ज्ञान ग्रहण करते प्रभु श्री राम का अत्यंत दिव्य पौराणिक चित्र अंकित है। यह अमूल्य ग्रंथ मानसिक अशांति, भ्रम और सांसारिक तनाव को दूर कर जीवन के वास्तविक सत्य और परम शांति को प्राप्त करने के लिए हर खोजी और पाठक के लिए एक श्रेष्ठ मार्गदर्शक है।
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