यह पावन धार्मिक ग्रंथ हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले 'पद्मपुराण' का संक्षिप्त रूप है, जिसका नामकरण भगवान विष्णु के नाभि-कमल (पद्म) से सृष्टि की उत्पत्ति के कारण हुआ है [11, 14]. प्रतिष्ठित धार्मिक प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस विशेष संस्करण को केवल हिन्दी भाषा में तैयार किया गया है, जिसमें बिना श्लोकों के पूरी कथाओं और प्रसंगों को अत्यंत सरल और प्रवाहमयी भाषा में प्रस्तुत किया गया है. इस ग्रंथ में भगवान विष्णु की असीम महिमा, विभिन्न तीर्थों का महत्व, व्रत-उपवास की विधियाँ, सृष्टि खंड, पाताल खंड, और उत्तर खंड सहित सनातन धर्म के नैतिक व आध्यात्मिक कर्तव्यों का विस्तृत मार्गदर्शन मिलता है. पुस्तक में समाहित सुंदर पौराणिक रंगीन चित्र (सचित्र) कथाओं को और अधिक मनमोहक और बोधगम्य बनाते हैं, जो दैनिक स्वाध्याय, घर में धार्मिक संस्कारों के सिंचन और मानसिक शांति के लिए एक उत्तम धरोहर है.
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![संक्षिप्त पद्मपुराण [केवल हिन्दी] — गीता प्रेस गोरखपुर (कोड: 44)](https://static.wixstatic.com/media/d17231_f8fed9a9fb854e2da473196105af41a1~mv2.jpg/v1/fill/w_680,h_630,al_c,q_85,enc_avif,quality_auto/d17231_f8fed9a9fb854e2da473196105af41a1~mv2.jpg)