यह पवित्र ग्रंथ महाभारत का खिलभाग (परिशिष्ट) माना जाने वाला 'श्रीहरिवंशपुराण' है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण और यदुवंश के इतिहास का सबसे प्रामाणिक स्रोत माना जाता है. प्रामाणिक धार्मिक प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस विशेष संस्करण को केवल हिन्दी भाषा में अनुवादित किया गया है, और वरिष्ठ पाठकों की सुविधा के लिए इसे मोटे अक्षरों (Mota Type) में छापा गया है ताकि पढ़ने में कोई कठिनाई न हो. इस महापुराण में मुख्य रूप से तीन प्रमुख पर्वों—हरिवंश पर्व, विष्णु पर्व और भविष्य पर्व—के माध्यम से सृष्टि की उत्पत्ति, यदुवंश का इतिहास, भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल-लीलाओं, कंस वध तथा महाभारत काल के बाद की घटनाओं का अत्यंत सजीव व मनमोहक वर्णन मिलता है. पुस्तक में समाहित दिव्य पौराणिक रंगीन चित्र (सचित्र) कथाओं को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं, जो घर में सुख-समृद्धि लाने, पुत्र-प्राप्ति की पौराणिक मान्यताओं के श्रवण-पठन और आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि के लिए एक श्रेष्ठ धार्मिक धरोहर है.
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