भगवान विष्णु के पावन वामन अवतार की दिव्य महिमा और सनातन अध्यात्म के अद्भुत रहस्यों से परिपूर्ण श्रीवामनपुराण (कोड 1432) के माध्यम से अपनी आत्मिक चेतना को जागृत करें। अठारह महापुराणों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले इस पावन ग्रंथ को विश्व प्रसिद्ध गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा मूल श्लोकों के साथ अत्यंत सरल, प्रामाणिक और सुगम हिंदी अनुवाद सहित प्रकाशित किया गया है। इस महापुराण में भगवान त्रिविक्रम (वामन देव) और भक्तराज बलि के पावन चरित्र के साथ-साथ कुरुक्षेत्र, पृथूदक आदि तीर्थों की महिमा, सदाचार के नियम, व्रत-उपवास की विधियाँ और भगवान शिव-पार्वती के दिव्य प्रसंगों का अत्यंत सुंदर समन्वय है। सुंदर आकर्षक रंगीन चित्रों (सचित्र) से सुसज्जित और उच्च गुणवत्ता की छपाई वाली यह पौराणिक कृति आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, पूजा-पाठ तथा प्रत्येक सनातन धर्मी परिवार के पुस्तकालय के लिए एक अनिवार्य और परम कल्याणकारी धरोहर है।
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