यह पावन ग्रंथ सनातन धर्म के सबसे पूजनीय पुराणों में से एक श्रीमद्भागवत महापुराण का द्वितीय खंड है, जो मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के पूर्ण पुरुषोत्तम स्वरूप और उनकी लीलाओं पर केंद्रित है. धार्मिक ग्रंथों के प्रतिष्ठित प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस प्रामाणिक संस्करण में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ अत्यंत सरल, शुद्ध और प्रवाहमयी हिंदी व्याख्या (अनुवाद) दी गई है. इस द्वितीय खंड में (विशेष रूप से नवम से द्वादश स्कंध तक) भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्म, उनकी मनमोहक बाल-लीलाओं, गोपी-प्रेम, कंस वध, द्वारका लीला और उद्धव-गीता के माध्यम से परम ज्ञान व मोक्ष मार्ग की अद्भुत व्याख्या की गई है. पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर घुटनों के बल चलते बालकृष्ण की अत्यंत सुंदर छवि अंकित है और इसके भीतर समाहित मनमोहक रंगीन चित्र (सचित्र) कथा प्रसंगों को जीवंत बनाते हैं. यह पवित्र ग्रंथ भक्ति रस में डूबने, मानसिक शांति प्राप्त करने और घर में सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक चेतना के विस्तार के लिए एक अनिवार्य एवं अमूल्य निधि है.
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![श्रीमद्भागवत-महापुराण [द्वितीय-खण्ड] (सचित्र, हिंदी-व्याख्यासहित) — गीता प्रेस](https://static.wixstatic.com/media/d17231_1444bfd7f10843e38f42e2cb3ec1e4ff~mv2.jpg/v1/fill/w_759,h_684,al_c,q_85,enc_avif,quality_auto/d17231_1444bfd7f10843e38f42e2cb3ec1e4ff~mv2.jpg)