यह महान ग्रंथ गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित 'श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी' है, जिसके टीकाकार परम श्रद्धेय स्वामी रामसुखदास जी महाराज हैं। यह गीता के इतिहास में सबसे प्रामाणिक, विस्तृत और कल्याणकारी व्याख्याओं में से एक मानी जाती है, जिसे विशेष रूप से साधकों के व्यावहारिक आध्यात्मिक विकास के लिए तैयार किया गया है। पुस्तक में प्रत्येक श्लोक के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों, पदों के अर्थों और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों को अत्यंत सरल, सुबोध और व्यावहारिक हिंदी भाषा में समझाया गया है। इसके अंत में जुड़ा अनूठा 'परिशिष्ट' विषय को और अधिक स्पष्ट करता है, जिससे गृहस्थ, जिज्ञासु और संन्यासी सभी अपने दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान पाते हुए सुगमता से मोक्ष और भगवत्प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित) हिन्दी-टीका - स्वामी रामसुखदास, गीत
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