यह विश्वप्रसिद्ध और पावन ग्रंथ सनातन धर्म का सर्वोच्च आध्यात्मिक मार्गदर्शन करने वाली 'श्रीमद्भगवद्गीता' का सबसे प्रामाणिक संस्करण है, जिसे 'तत्त्वविवेचनी' टीका के नाम से जाना जाता है. गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस विशेष पुस्तक में कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए दिव्य उपदेशों के मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ उनके पदों का अर्थ और अत्यंत गंभीर व व्यावहारिक हिन्दी-टीका (व्याख्या) दी गई है. श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज या गीता प्रेस के मूर्धन्य विद्वानों के सिद्धांतों पर आधारित यह टीका कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल भाषा में आम पाठकों के लिए सुलभ बनाती है. पुस्तक के मुख्य पृष्ठ पर अर्जुन के रथ पर सारथी बने भगवान श्रीकृष्ण का सुंदर पौराणिक चित्र अंकित है, जो जीवन के कठिन समय में सही निर्णय लेने, मानसिक शांति प्राप्त करने और आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए हर मनुष्य के घर में होना अनिवार्य है.
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