यह पुस्तक गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज द्वारा रचित 'विनय-पत्रिका' का एक प्रामाणिक और लोकप्रिय संस्करण है। ब्रजभाषा के श्रेष्ठतम पदों से सजे इस दिव्य ग्रंथ में भक्तशिरोमणि तुलसीदास जी ने कलिकाल के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्री सीताराम जी के चरणों में अपनी विनय (प्रार्थना) की अर्जी लगाई है। इस विशिष्ट संस्करण में पुस्तक कोड 105 के अंतर्गत मूल पदों के साथ उनका बहुत ही सुबोध और सरल हिंदी भावार्थ दिया गया है, जिससे साधारण से साधारण पाठक भी प्रभु के प्रति तुलसीदास जी के अनन्य प्रेम, दैन्य भाव और शरणागति को गहराई से महसूस कर सकता है। अपने स्पष्ट अक्षरों, मनोहारी आवरण चित्र और उच्च गुणवत्ता के कारण यह ग्रंथ नित्य पाठ, स्वाध्याय और प्रभु भक्ति का आनंद लेने के लिए हर सनातनी परिवार के पूजाघर में रखने योग्य एक अमूल्य निधि है।
top of page
bottom of page



