यह पुस्तक गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित 'लघुसिद्धान्तकौमुदी' है, जिसकी रचना महान विद्वान श्री वरदराजाचार्य जी ने की है। यह ग्रंथ संस्कृत व्याकरण सीखने के इच्छुक विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए महर्षि पाणिनि के अष्टाध्यायी सूत्रों को समझने की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत प्रवेशिका है। इसमें जटिल व्याकरण नियमों, संधियों, समासों, और धातु रूपों को अत्यंत सरल, संक्षिप्त और क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया है। मूल संस्कृत सूत्रों के साथ-साथ इसमें व्यावहारिक व्याख्या भी दी गई है, जो इसे विभिन्न पारंपरिक पाठशालाओं, विश्वविद्यालयों के छात्रों और संस्कृत भाषा की संरचना को गहराई से जानने के शौकीनों के लिए एक अनिवार्य और प्रामाणिक पाठ्यपुस्तक बनाती है।
लघुसिद्धान्तकौमुदी (श्रीमद्विद्वद्वर-वरदराजाचार्यप्रणीता) - गीताप्रेस गोरखपुर (प
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