यह अमूल्य ग्रंथ सनातन दर्शन परंपरा के छह आस्तिक दर्शनों में से एक 'योग दर्शन' का अत्यंत प्रामाणिक और सुलभ संस्करण है, जिसे महर्षि पतंजलि द्वारा मूल रूप से सूत्रबद्ध किया गया और गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा सरल हिंदी व्याख्या सहित प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक में मानव चित्त की वृत्तियों को नियंत्रित करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और आत्म-साक्षात्कार के लिए अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि) के चार पादों—समाधिपाद, साधनपाद, विभूतिपाद और कैवल्यपाद की बहुत ही स्पष्ट और गूढ़ व्याख्या प्रस्तुत की गई है। योग साधना के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों को समझने, तनाव मुक्त जीवन जीने और आध्यात्मिक उन्नति के इच्छुक साधकों, विद्यार्थियों तथा योग-प्रेमियों के लिए यह पावन कृति एक परम आवश्यक और मार्गदर्शक ग्रंथ है।
महर्षि पतंजलि कृत योग-दर्शन हिन्दी-व्याख्यासहित - गीताप्रेस (कोड 135)
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