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यह पावन धार्मिक ग्रंथ हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'मत्स्यमहापुराण' है, जो मुख्य रूप से भगवान विष्णु के प्रथम दिव्य 'मत्स्य अवतार' (मछली के रूप में अवतार) की कथा और उपदेशों पर आधारित है. सनातन धर्म के प्रमुख प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित इस प्रामाणिक संस्करण में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ अत्यंत सरल और सुबोध हिन्दी अनुवाद दिया गया है. इस महापुराण में प्रलय के समय भगवान मत्स्य द्वारा राजा सत्यव्रत (वैवस्वत मनु) और सप्तऋषियों की रक्षा करने की मुख्य कथा के साथ-साथ सृष्टि की रचना, राजधर्म, व्रत-त्योहार, पवित्र तीर्थों का महात्म्य, मूर्ति निर्माण तथा वास्तुकला (आर्किटेक्चर) के प्राचीन नियमों का अत्यंत अद्भुत वर्णन मिलता है. पुस्तक के मुख्य पृष्ठ पर विशाल मत्स्य रूपी भगवान विष्णु द्वारा ऋषियों की नौका को संकट से उबारने का अत्यंत मनमोहक पौराणिक चित्र अंकित है, तथा इसके भीतर समाहित सुंदर रंकिनी चित्र (सचित्र) इन प्रसंगों को और अधिक स्पष्ट व जीवंत बनाते हैं. यह ग्रंथ सनातन संस्कृति के प्राचीन इतिहास को जानने, घर में ज्ञान का प्रकाश फैलाने और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक अमूल्य धरोहर है.

मत्स्यमहापुराण (सचित्र, हिन्दी-अनुवादसहित) — गीता प्रेस गोरखपुर (कोड: 2227 / 355

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