यह पावन धार्मिक पुस्तक गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज द्वारा विरचित सुप्रसिद्ध महाकाव्य श्रीरामचरितमानस का दूसरा और अत्यंत भावपूर्ण अध्याय 'अयोध्याकाण्ड' है, जिसे गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा हिंदी अनुवाद सहित स्वतंत्र रूप से प्रकाशित किया गया है। इस विशिष्ट संस्करण को पाठकों की सुविधा के लिए बड़े और सुस्पष्ट अक्षरों में छापा गया है, जिसमें भगवान श्री राम के राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के दो वरदान, दशरथ जी का पुत्र-वियोग में प्राण त्यागना, प्रभु राम, माता सीता और लक्ष्मण जी का वनगमन तथा भरत जी के अनुपम भ्रातृ-प्रेम और चित्रकूट निवास का अत्यंत मर्मस्पर्शी व सजीव वर्णन है। सरल हिंदी व्याख्या के साथ तैयार की गई यह पावन कृति घर में नियमित स्वाध्याय करने, पारिवारिक आदर्शों को समझने और मन में गहरी भक्ति की भावना जागृत करने के लिए एक अत्यंत उत्तम एवं कल्याणकारी मार्गदर्शिका है।
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